Śrīkoṣa
Chapter 4

Verse 4.18

अथ ह शौनकञ्च कापेयमभिप्रतारिणञ्च काक्षसेनिं परिविष्यमाणौ ब्रह्मचारी बिभिक्षे तस्मा उह न ददतुः ।। 5 ।।

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