Śrīkoṣa
Chapter 1

Verse 1.67

सा या ब्रह्मणो जितिः या व्यष्टिः, तां जितिं जयति तां व्यष्टिं व्यश्नुते, य एवं वेद य एवं वेद ।। 67 ।।

Commentaries