Śrīkoṣa
Chapter 17

Verse 17.62

निरारम्भो निराशीश्च(निराशी च A. D. E.) निर्ममो निरहंकृतिः।
मामेव शरणं प्राप्य तरेत् संसारसागरम् ॥ 62 ॥