Śrīkoṣa
Chapter 10

Verse 10.52

करौ सम्मृज्य मूलेन नेत्रे बद्‌ध्वा सुवाससा।
नेत्रमन्त्रेण मेधावी सदशेनाहतेन तु॥ 10.53 ॥