Śrīkoṣa
Chapter 14

Verse 14.4

आद्ययोर्या शिला सैषा निर्दोषाऽपि तु नान्ययोः।
निमग्ना भुवि या रम्या स्निग्धाऽर्ककिरणोज्झिता॥ 14.4 ॥